सरकारी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल, अरुण वोरा ने शिक्षा मंत्री से मांगी सख्त कार्रवाई

जांच, दोषियों को कठोर दंड और सभी स्कूलों में बाल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की उठाई मांग

सरकारी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल, अरुण वोरा ने शिक्षा मंत्री से मांगी सख्त कार्रवाई

जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड स्थित एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पर लगे गंभीर आरोपों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषी पाए जाने पर कठोर कानूनी व विभागीय कार्रवाई के साथ प्रदेशभर के विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया।

दुर्ग। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला, डोंगाकोहरौद में प्रधानाध्यापक पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र भेजा है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने तथा आरोप सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

अपने पत्र में अरुण वोरा ने कहा कि यदि सामने आए आरोप सत्य साबित होते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, गुरु-शिष्य परंपरा और बच्चों की सुरक्षा के प्रति समाज के भरोसे पर गंभीर आघात है। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होने चाहिए, लेकिन ऐसी घटनाएं अभिभावकों की चिंता बढ़ाने के साथ शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़े करती हैं।

उन्होंने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि आरोपी के विरुद्ध कानून के सभी प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए तथा विभागीय स्तर पर भी तत्काल सख्त कदम उठाए जाएं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रदेश के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में प्रभावी निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था विकसित की जाए।

अरुण वोरा ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने प्रत्येक विद्यालय में अभिभावकों एवं महिला शिक्षकों की भागीदारी वाली बाल सुरक्षा समिति गठित करने, प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने, विद्यार्थियों के लिए गोपनीय शिकायत पेटी और टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू करने तथा प्रत्येक शिकायत पर 72 घंटे के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

इसके अलावा उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा विद्यालयों का नियमित औचक निरीक्षण, शिक्षकों के आचरण की सतत समीक्षा तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा सरकार को इस दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।