सुमति, ज्ञान और सत्संग की भूख ही ईश्वर जागरण का प्रमाण : दीदी माँ मन्दाकिनी

सुमति, ज्ञान और सत्संग की भूख ही ईश्वर जागरण का प्रमाण : दीदी माँ मन्दाकिनी

भिलाई के नेहरू नगर स्थित कबीर वाटिका में चल रही रामकथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

रामराज्य की स्थापना में भरत जैसे भाई की भूमिका को बताया अनिवार्य

भिलाई।नेहरू नगर स्थित कबीर वाटिका में आयोजित श्रीरामकथा के दौरान परमपूज्य दीदी माँ मन्दाकिनी श्रीरामकिंकरजी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के अंतःकरण में सुमति की भूख, ज्ञान की जिज्ञासा और सत्संग पाने की तीव्र इच्छा है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि उसके भीतर ईश्वर जागृत हो चुके हैं।

नेहरू नगर, भिलाई स्थित कबीर वाटिका में इन दिनों भक्तिमय वातावरण में श्रीरामकथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का आयोजन जवाहर ज्वेलर्स के संचालक श्री जितेन्द्र सोनी एवं श्री मुकेश सोनी द्वारा किया गया है। रामकथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्म, भक्ति और संस्कारों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

कथा के दौरान परमपूज्य दीदी माँ मन्दाकिनी श्रीरामकिंकरजी ने कहा कि सनातन धर्म में जन्म लेना स्वयं में एक सौभाग्य है। रामकथा हो या भागवत कथा—हर कथा का श्रवण मानव के जीवन को शुद्ध और कल्याणकारी बनाता है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने अंतःकरण से बुराइयों को निकालकर उसे पवित्र बनाना चाहते हैं, तो भगवान की कथा को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उसे अपने आचरण में भी उतारना होगा।

दीदी माँ ने रामराज्य की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान राम के साथ यदि भरत जैसा त्यागी, प्रेमी और मर्यादित भाई न होता, तो रामराज्य की कल्पना भी संभव नहीं थी। भरत का चरित्र भाईचारे, समर्पण और निस्वार्थ प्रेम का आदर्श उदाहरण है, जिससे समाज को सीख लेनी चाहिए।

रामकथा के दौरान भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का रसपान करते नजर आए।