AICC ने छत्तीसगढ़ के 4 कांग्रेस नेताओं को सौंपी नई जिम्मेदारी, यूपी–नागालैंड में निभाएंगे संगठनात्मक भूमिका

मोहन मरकाम, शिव डहरिया और राघवेंद्र सिंह बने उत्तर प्रदेश के ऑब्जर्वर उमेश पटेल को नागालैंड में संगठन सृजन अभियान की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष की मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव से लागू नियुक्तियां जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया की निगरानी करेंगे ऑब्जर्वर

AICC ने छत्तीसगढ़ के 4 कांग्रेस नेताओं को सौंपी नई जिम्मेदारी, यूपी–नागालैंड में निभाएंगे संगठनात्मक भूमिका

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने संगठन सृजन अभियान के तहत देश के छह राज्यों में ऑब्जर्वरों की नियुक्ति करते हुए छत्तीसगढ़ के चार वरिष्ठ नेताओं को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। इन नियुक्तियों को पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

रायपुर।कांग्रेस संगठन को नए सिरे से मजबूत करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे संगठन सृजन अभियान के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छह राज्यों—बिहार, उत्तर प्रदेश, गोवा, नागालैंड, मणिपुर और मेघालय—के लिए ऑब्जर्वरों की सूची जारी की है। इस सूची में छत्तीसगढ़ के चार कांग्रेस नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मोहन मरकाम को उत्तर प्रदेश का ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। उनके साथ अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह और पूर्व मंत्री शिव डहरिया को भी उत्तर प्रदेश में संगठन सृजन अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, पूर्व मंत्री उमेश पटेल को नागालैंड का ऑब्जर्वर बनाया गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष की मंजूरी के बाद इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। संगठन सृजन अभियान के तहत इन नेताओं को संबंधित राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने और जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

राजनीतिक दृष्टि से अहम राज्य उत्तर प्रदेश में छत्तीसगढ़ के अनुभवी नेताओं की तैनाती को कांग्रेस के लिए रणनीतिक कदम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन नेताओं का संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक समझ संगठन को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने में सहायक होगा।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान पार्टी को नए स्वरूप में खड़ा करने की व्यापक कवायद का हिस्सा है। इसके तहत संगठन को अधिक लोकतांत्रिक बनाने, कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने और आगामी चुनावों के लिए मजबूत ढांचा तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का विश्वास है कि अनुभवी नेताओं को विभिन्न राज्यों में भेजने से संगठनात्मक अनुभव का बेहतर आदान-प्रदान होगा और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।