BSP स्क्रैप चोरी मामले में पूर्व महाप्रबंधक को हाईकोर्ट से राहत, हिमांशु भूषण मलिक को मिली जमानत
250 टन लोहा और फ्लू डस्ट के कथित अवैध परिवहन मामले में 9 जुलाई से थे न्यायिक हिरासत में, पहली जमानत याचिका स्वीकार
दुर्ग-भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के ब्लास्ट फर्नेस विभाग से कथित रूप से 250 टन लोहा चोरी और फ्लू डस्ट के अवैध परिवहन से जुड़े मामले में पूर्व महाप्रबंधक (जीएम) हिमांशु भूषण मलिक को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने 10 अगस्त को उनकी पहली जमानत याचिका मंजूर कर ली। मलिक को पुरानी भिलाई पुलिस ने 9 जुलाई को गिरफ्तार किया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में थे।
ब्लास्ट फर्नेस विभाग से जुड़ा है मामला
यह मामला पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में दर्ज है और ब्लास्ट फर्नेस विभाग से फ्लू डस्ट के कथित अवैध परिवहन तथा स्क्रैप चोरी से संबंधित है। प्रारंभिक जांच में दो ट्रकों के माध्यम से संयंत्र परिसर से फ्लू डस्ट बाहर ले जाए जाने की शिकायत सामने आई थी।
ट्रकों की जांच से बढ़ा संदेह
पुलिस जांच के दौरान ट्रकों में ले जाए जा रहे कुछ फेरस स्क्रैप के बीएसपी की संपत्ति होने का संदेह व्यक्त किया गया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और स्क्रैप चोरी, स्टॉक रिकॉर्ड तथा निगरानी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल शुरू की गई।
हेराफेरी और निगरानी में लापरवाही की जांच
जांच एजेंसियों ने स्क्रैप यार्ड की निगरानी, रिकॉर्ड प्रबंधन और कथित हेराफेरी से जुड़े कई लोगों की भूमिका की जांच की। इसी क्रम में पूर्व महाप्रबंधक हिमांशु भूषण मलिक को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था।
आगे भी जारी रहेगी जांच
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी मामले की जांच जारी रहेगी। पुलिस और संबंधित एजेंसियां स्क्रैप के कथित अवैध परिवहन, रिकॉर्ड में संभावित अनियमितताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
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