चम्मच छोड़िए, हाथ से खाइए : आयुर्वेद और रिसर्च में साबित हुए 10 बड़े फायदे
हाथ से खाने से पाचन सुधरता है, स्ट्रेस घटता है और माइंडफुल ईटिंग की आदत बनती है; लेकिन 9 सावधानियां जरूरी
आज की भागदौड़ भरी लाइफ में ज्यादातर लोग कांटे-चम्मच से खाना 'मॉडर्न आदत' मानते हैं। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि हाथ से खाना शरीर और मन दोनों के लिए ज्यादा फायदेमंद है। यह सिर्फ पेट भरने की प्रक्रिया नहीं बल्कि खाने को महसूस करने और धीरे-धीरे ग्रहण करने का अनुभव है। यही वजह है कि आज भी करोड़ों लोग हाथ से ही भोजन करना पसंद करते हैं।
हेल्थ (डेस्क)। भोजन करना केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने वाला अनुभव है। प्राचीन सभ्यताओं—मिस्र, ग्रीस और भारत—में भोजन हाथ से खाने की परंपरा रही है। आयुर्वेद के अनुसार हाथ की पांच उंगलियां पंचमहाभूत का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंगूठा अग्नि, तर्जनी वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका पृथ्वी और कनिष्ठा जल का प्रतीक है। यही कारण है कि हाथ से भोजन करने पर ये तत्व सक्रिय होकर ऊर्जा का संतुलन बनाए रखते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाथ से भोजन करने से दिमाग को तुरंत सिग्नल मिलता है कि खाना मिलने वाला है। इससे लार और पाचन एंजाइम्स का स्राव बढ़ता है, जिससे भोजन आसानी से पचता है। यही नहीं, यह माइंडफुल ईटिंग की आदत डालता है, जो मोटापा और स्ट्रेस दोनों कम करता है।
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी भी देते हैं कि हाथ से भोजन करने से पहले सफाई पर विशेष ध्यान जरूरी है। हाथों को अच्छी तरह धोना और नाखूनों की सफाई करना बेहद अहम है। स्किन इंफेक्शन, हैंड ट्रेमर्स या सर्जरी के बाद के मरीजों को डॉक्टर की सलाह से ही हाथ से भोजन करना चाहिए।
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