गाइडलाइन बढ़ोतरी पर सियासत तेज: रायपुर में रजिस्ट्री बहिष्कार की तैयारी
व्यापारियों ने की सार्वजनिक बहिष्कार की बात, कांग्रेस ने सरकार पर लगाया लोकविरोधी निर्णयों का आरोप; भाजपा सांसद ने भी बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
छत्तीसगढ़ में जमीन रजिस्ट्री की नई गाइडलाइन को लेकर विरोध लगातार गहराता जा रहा है। राजधानी रायपुर में मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और जमीन कारोबारियों की बैठक में रजिस्ट्री के सामूहिक बहिष्कार और आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। वहीं, गाइडलाइन बढ़ोतरी पर अब सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
रायपुर: जमीन रजिस्ट्री की संशोधित गाइडलाइन को लेकर छत्तीसगढ़ में विरोध की लहर और तेज हो गई है। विपक्ष, व्यापारिक संगठन और आम नागरिक पहले ही इस फैसले को बोझिल बता रहे थे, अब कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोलते हुए जमीन कारोबारियों के बीच पहुंचकर बैठक की। करीब दो घंटे चली इस बैठक में रजिस्ट्री के सार्वजनिक बहिष्कार से लेकर आगे के आंदोलन तक की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक व पूर्व महापौर प्रमोद दुबे मौजूद रहे।
बैठक में बोलते हुए प्रमोद दुबे ने राज्य सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि साय सरकार बनने के बाद से ही जनविरोधी निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनका प्रभाव सीधे आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। दुबे ने कहा कि बिजली बिल हाफ योजना में कटौती हो या जमीन रजिस्ट्रेशन की गाइडलाइन—हर कदम जनता के हितों के विपरीत साबित हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ओपी चौधरी द्वारा जारी नई गाइडलाइन वित्तीय वर्ष के मध्य में लागू कर दी गई, जबकि ऐसे संशोधन आमतौर पर वित्त वर्ष की शुरुआत में घोषित किए जाते हैं। इससे किसानों, व्यापारियों और सामान्य खरीदारों पर अतिरिक्त कर बोझ पड़ गया है। प्रमोद दुबे ने यह भी याद दिलाया कि रमन सरकार ने अपने शासनकाल में छोटी रजिस्ट्री को बंद कर दिया था, जिसे भूपेश बघेल सरकार ने फिर से शुरू करते हुए गाइडलाइन दरों में 30% तक की कमी कर जनता को राहत दी थी। उनके अनुसार, उस अवधि में जमीन बाजार स्थिर रहा और कारोबार सुचारू ढंग से चला, जबकि वर्तमान सरकार के निर्णय अव्यावहारिक और बाजार विरोधी साबित हो रहे हैं।
सत्ता पक्ष में भी बढ़ी बेचैनी
नई गाइडलाइन बढ़ोतरी को लेकर अब भाजपा के भीतर भी नाराजगी दिखाई देने लगी है। रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर इस आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की है। सांसद ने इसे “अव्यावहारिक, बिना जन-परामर्श” और “आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाला निर्णय” बताया है।
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कलेक्टर गाइडलाइन दरों में 100% से लेकर 800% तक की वृद्धि कर दी गई है, जिससे किसान, छोटे व्यापारी, कुटीर उद्योग, मध्यम वर्ग, रियल एस्टेट सेक्टर और निवेशक तक सभी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवजा मिलेगा, जबकि राज्य में सिर्फ 1% भूमि ही इस प्रक्रिया में आती है और 99% लोग बेवजह आर्थिक दबाव में आ जाएंगे।
उन्होंने रजिस्ट्री शुल्क को दोबारा 0.8% करने और पुरानी गाइडलाइन को बहाल करने की मांग भी रखी है।
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