NGO घोटाले पर CBI का शिकंजा कसता जा रहा: समाज कल्याण विभाग में दबिश, मंत्री और IAS अफसरों की भूमिका जांच के दायरे में

CBI ने मना स्थित समाज कल्याण विभाग कार्यालय से SRC से जुड़े दस्तावेज जब्त किए, 14 लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप; दिव्यांगों की मदद के नाम पर बना NGO अब जांच के घेरे में

NGO घोटाले पर CBI का शिकंजा कसता जा रहा: समाज कल्याण विभाग में दबिश, मंत्री और IAS अफसरों की भूमिका जांच के दायरे में

छत्तीसगढ़ में करोड़ों के NGO घोटाले की जांच ने अब रफ्तार पकड़ ली है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को मना स्थित समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में दबिश दी और स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। इस मामले में एक मंत्री समेत सात IAS और कई राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के नाम सामने आने से हड़कंप मच गया है।

रायपुर। समाज कल्याण विभाग में हुए कथित NGO घोटाले की जांच CBI ने तेज कर दी है। सोमवार को CBI के अधिकारी मना स्थित समाज कल्याण विभाग कार्यालय पहुंचे और विभाग के डिप्टी डायरेक्टर से SRC से संबंधित फाइलें और रिकॉर्ड मांगे। अधिकारियों ने NGO से जुड़े तीन बंडल दस्तावेजों की फोटोकॉपी कर जांच के लिए अपने साथ ले गए।

सूत्रों के अनुसार, CBI इन दस्तावेजों की प्राथमिक जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। इस मामले में एक पूर्व मंत्री, सात IAS अफसरों सहित कुल 14 लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं।

CBI की टीम विभाग में सरकारी वाहनों के काफिले के साथ पहुंची थी। अधिकारियों की मौजूदगी से कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दरअसल, 2004 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रेणुका सिंह, रिटायर्ड IAS विवेक ढांढ, एम.के. राउत, डॉ. आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बी.एल. अग्रवाल, सतीश पांडे और पी.पी. श्रोती ने मिलकर दो NGO का गठन किया था। कहा गया था कि ये संस्थाएं दिव्यांगजनों की सहायता के लिए काम करेंगी — जैसे कि व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, कृत्रिम अंग और सुनने की मशीनों का वितरण — लेकिन जांच में सामने आया कि ये सभी कार्य केवल कागज़ों में ही दर्ज थे।

जमीन पर कोई वास्तविक काम नहीं हुआ, जबकि बड़े पैमाने पर राशि निकाली गई। CBI अब इन NGO की फंडिंग, खर्च और अनुमोदन प्रक्रिया की परतें खोलने में जुटी है।