“किसान बेहाल, सरकार खामोश” : मनरेगा और धान खरीदी को लेकर दुर्ग में कांग्रेस का प्रदर्शन
गांधी शहादत दिवस पर सड़क पर उतरी कांग्रेस, अरुण वोरा बोले—भाजपा की नीतियां किसानों को आत्महत्या की ओर धकेल रहीं
दुर्ग।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर कांग्रेस पार्टी ने प्रदेशभर में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मनरेगा को बचाने और धान खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में धरना-प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नई ग्रामीण रोजगार योजना VB-G RAM G को मनरेगा को कमजोर करने की साजिश बताया है।
इसी क्रम में दुर्ग शहर में हिंदी भवन के सामने एकदिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन में दुर्ग के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा विशेष रूप से शामिल हुए। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान मौजूद रहे।
मीडिया से चर्चा करते हुए अरुण वोरा ने कहा कि यदि भाजपा सरकार वास्तव में महात्मा गांधी के आदर्शों का सम्मान करती, तो मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना से छेड़छाड़ करने का साहस नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि आज हालात यह हैं कि ग्रामीण मजदूरों को काम नहीं मिल रहा और किसान धान बेचने के लिए टोकन तक पाने को तरस रहे हैं।
वोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसान लगातार मानसिक दबाव और अपमान झेल रहा है। धान खरीदी केंद्रों में टोकन नहीं मिलने से किसान महीनों तक सरकारी दफ्तरों और केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जिलों से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां हताश किसानों ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की।
जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा क्षेत्र की घटना का जिक्र करते हुए अरुण वोरा ने कहा कि सैकड़ों क्विंटल धान उत्पादन करने वाला किसान एक महीने तक खरीदी केंद्रों के चक्कर काटता रहा, लेकिन जब उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसने वीडियो बनाकर कीटनाशक पी लिया। उन्होंने कहा कि यह एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सरकार की असंवेदनशील नीतियों की त्रासदी है।
उन्होंने बताया कि महासमुंद और कोरबा जिलों में भी इसी तरह टोकन नहीं मिलने से परेशान किसानों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अरुण वोरा ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन सरकार नए कानून के नाम पर इसे कमजोर कर रही है।
वोरा ने आरोप लगाया कि मजदूरों को न समय पर काम मिल रहा है और न ही मजदूरी का भुगतान हो रहा है। यदि किसानों और मजदूरों को मरने के लिए मजबूर किया जाए और सरकार मूकदर्शक बनी रहे, तो यह लोकतंत्र नहीं बल्कि घोर अन्याय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ती रहेगी।
suntimes 