दुर्ग में स्कूल बसों की सख्त जांच: 65 बसों में खामियां उजागर, 50 हजार से अधिक का जुर्माना, 26 ड्राइवरों की आंखों में पाई गई कमी
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत भिलाई सेक्टर-6 में चला संयुक्त जांच अभियान, 230 बसों की हुई जांच
*दुर्ग जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को भिलाई के सेक्टर-6 स्थित पुलिस ग्राउंड में स्कूल बसों की व्यापक जांच की गई। इस दौरान कई बसों में नियमों की अनदेखी सामने आई, जिस पर कार्रवाई करते हुए चालान काटे गए और ड्राइवरों को जरूरी स्वास्थ्य संबंधी सलाह भी दी गई।*
दुर्ग-भिलाई। दुर्ग जिले में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने रविवार को संयुक्त रूप से स्कूल बसों की विशेष जांच अभियान चलाया। यह अभियान सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों के तहत आयोजित किया गया, जिसमें जिले के 21 स्कूलों की कुल 230 बसों की बारीकी से जांच की गई।
जांच के दौरान 65 स्कूल बसों में विभिन्न प्रकार की कमियां पाई गईं। इन खामियों को गंभीरता से लेते हुए मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत संबंधित बसों पर चालान की कार्रवाई की गई। इस दौरान कुल 50,900 रुपये का समन शुल्क वसूला गया। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए कि जब तक सभी खामियां दूर नहीं की जातीं, तब तक बसों का संचालन न किया जाए।
ड्राइवर-कंडक्टरों के स्वास्थ्य की भी जांच
बसों की जांच के साथ-साथ चालक और परिचालकों की स्वास्थ्य जांच भी की गई। विशेष रूप से आंखों की जांच में 26 ड्राइवरों की दृष्टि कमजोर पाई गई, जिन्हें चश्मा लगाने या नंबर अपडेट कराने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा में ड्राइवर की फिटनेस बेहद जरूरी है।
दस्तावेजों की हुई गहन जांच
जांच के पहले चरण में सभी बसों का पंजीकरण किया गया। इसके बाद परिवहन विभाग द्वारा वाहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, पीयूसी, रोड टैक्स और चालक का वैध लाइसेंस शामिल रहा।
मैकेनिकल फिटनेस पर भी विशेष ध्यान
दस्तावेज जांच के बाद बसों की तकनीकी स्थिति परखी गई। इसमें हेडलाइट, ब्रेक लाइट, इंडिकेटर, पार्किंग लाइट, हॉर्न, वाइपर, स्टीयरिंग, टायर, क्लच, एक्सीलेटर, सीटों की स्थिति और आगे-पीछे लगे रिफ्लेक्टर की जांच की गई।
CCTV, GPS और इमरजेंसी गेट की जांच
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार बसों में जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर, प्रेशर हॉर्न, आपातकालीन खिड़की, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और बस पर स्पष्ट रूप से “स्कूल बस” लिखा होना अनिवार्य पाया गया। साथ ही स्कूल का नाम, संपर्क नंबर और चालक का मोबाइल नंबर भी जांचा गया।
जांच से बची बसें भी नहीं होंगी सुरक्षित
यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने बताया कि जो स्कूल बसें इस जांच शिविर में शामिल नहीं हो सकीं, उन्हें सड़क पर चलते समय रोककर जांचा जाएगा। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि रखते हुए सभी नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करें।
suntimes 