बिलासपुर अग्निकांड ने खोली सिस्टम की पोल: मित्तल फर्नीचर में अवैध तारपीन तेल भंडारण, 2 की मौत
बिना अनुमति रखा गया 10 हजार लीटर ज्वलनशील थीनर; फायर सेफ्टी केवल कागजों तक, दो दिन बाद भी कार्रवाई शून्य
सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र स्थित मित्तल फर्नीचर कारखाने में हुए भीषण अग्निकांड ने प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है। हादसे में दो लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जांच में कारखाने में भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ के अवैध भंडारण का खुलासा हुआ है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मित्तल फर्नीचर कारखाने में हुए अग्निकांड ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया है कि कारखाना परिसर में बिना किसी वैधानिक अनुमति के लगभग 10 हजार लीटर तारपीन तेल (थीनर) का भंडारण किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि औद्योगिक सुरक्षा, पर्यावरण विभाग और स्थानीय प्रशासन से जुड़े अधिकारी इस गंभीर चूक को लंबे समय से नजरअंदाज करते रहे।
हादसे के दो दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या विभाग पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पूरे मामले को दबाने की आशंका भी गहराने लगी है। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि कारखाना परिसर में खड़े एक टैंकर में अब भी बड़ी मात्रा में ज्वलनशील थीनर मौजूद है।
घटना के समय टैंकर से थीनर निकाले जाने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान पास में रखे गैलनों में मौजूद ज्वलनशील पदार्थ के बीच लगे इलेक्ट्रिक बोर्ड में अचानक स्पार्किंग हो गई, जिससे आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने आसपास के भंडारण क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।
गनीमत रही कि आग टैंकर के अंदर तक नहीं पहुंच सकी, अन्यथा भीषण विस्फोट से पूरे औद्योगिक क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंच सकता था और कई अन्य कारखाने भी इसकी चपेट में आ सकते थे। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि कारखाने में फायर सेफ्टी के इंतजाम केवल दस्तावेजों तक सीमित थे, जबकि मौके पर सुरक्षा के ठोस इंतजाम नदारद थे।
फिलहाल प्रशासन की ओर से जांच जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन पीड़ितों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।
suntimes 