भारतमाला परियोजना में 32 करोड़ का बड़ा घोटाला: अफसर–दलाल गठजोड़ ने किसानों को डराकर जमीन हथियाई, फर्जी दस्तावेजों से लिया मुआवजा
EOW की चार्जशीट में खुलासा – राजस्व अफसरों, दलालों और बिचौलियों ने मिलकर बनाई फर्जी सिंडिकेट, किसानों से साइन कराए धोखे से, 12 बंडलों में 8000 पन्नों का चालान पेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ की चर्चित भारतमाला परियोजना घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे राजस्व महकमे को हिला दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि अफसरों और जमीन दलालों के गठजोड़ ने मिलकर एक संगठित सिंडिकेट बनाया, जिसने किसानों को डराकर उनकी जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और 32 करोड़ रुपए का मुआवजा हड़प लिया।
EOW ने सोमवार, 13 अक्टूबर को रायपुर की विशेष न्यायालय में 12 बंडलों में 8000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट पेश की है। इसमें बताया गया है कि कैसे दलालों ने किसानों को यह कहकर भ्रमित किया कि उनके नामांतरण और सीमांकन अधूरे हैं, जिससे उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। बाद में राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों के नाम पर फर्जी साइन और बैक डेट में दस्तावेज तैयार कराए गए।
कैसे रचा गया 32 करोड़ का फर्जीवाड़ा
EOW की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्व अफसरों, तहसीलदारों और निजी दलालों ने तीन बड़े तरीकों से यह घोटाला अंजाम दिया —
फर्जी जमीन मालिक दिखाकर मुआवजा लेना: उमा तिवारी के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर केदार तिवारी, हरमीत खनूजा और विजय जैन ने उगेतरा की जमीन से 2.13 करोड़ रुपए का मुआवजा लिया।
बैक डेट में तैयार दस्तावेज: नायकबांधा, उरला और टोकरो क्षेत्रों की जमीनों के बैक डेट बंटवारे और नामांतरण दिखाकर 26.79 करोड़ रुपए का मुआवजा लिया गया।
एक ही जमीन पर दो बार मुआवजा:
नायकबांधा डैम के अधिग्रहण में शामिल जमीन को फिर से भारतमाला परियोजना में दर्शाकर 2.34 करोड़ रुपए का दोहरा मुआवजा जारी कराया गया।
अफसरों की मिलीभगत, बैंक खातों से हुआ धन का लेन-देन
जांच में खुलासा हुआ कि दलाल हरमीत खनूजा की पत्नी खुद तहसीलदार हैं। खनूजा ने विजय जैन, खेमराज कोसले और केदार तिवारी के साथ मिलकर फर्जी नामांतरण और दस्तावेज तैयार किए। मुआवजे की रकम के लिए ICICI बैंक महासमुंद शाखा में खाते खोले गए, जिनमें पैसा जमा कर बाद में निजी संस्थाओं के जरिए निकाला गया।
EOW की जांच के घेरे में ये अधिकारी
EOW अब तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, आरआई रोशन लाल वर्मा, पटवारी जितेंद्र साहू, बसंती घृतलहरे, दिनेश पटेल और लेखराम देवांगन की भूमिका की जांच कर रही है। सभी को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि कई आरोपी फिलहाल फरार हैं।
EOW की पैरवी में तीन मुख्य बिंदु
- EOW के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि अपराध तीन स्तरों पर किया गया —
- पहले से अधिग्रहित जमीनों पर दोबारा मुआवजा लेना।
- दस्तावेजों की तारीखें बदलकर 2019 से पहले का दिखाना, ताकि प्रति वर्ग फुट दर से अधिक भुगतान मिले।
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