मैत्रीबाग निजीकरण की राह पर, बीएसपी ने सौंपा संचालन का रास्ता
रूस-भारत मैत्री का प्रतीक मैत्रीबाग अब निजी हाथों में देने की तैयारी, सेल ने चुपचाप मांगे आवेदन, जनता बेखबर
भिलाई। देश–विदेश में पहचान बना चुके भिलाई स्टील प्लांट के मैत्रीबाग को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सेल प्रबंधन ने ‘रूचि की अभिव्यक्ति’ के तहत आवेदन आमंत्रित कर दिए हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण कदम की जानकारी आम जनता तक बिना शोर-शराबे के पहुंचाई गई। स्थानीय लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी, जबकि अंग्रेजी अखबार में चुपचाप इश्तिहार जारी कर दिया गया।
भिलाई में स्थित बीएसपी का ऐतिहासिक और पर्यटन आकर्षण का केंद्र मैत्रीबाग अब निजी हाथों में जाने की दिशा में बढ़ रहा है। सेल प्रबंधन ने इसके संचालन और रखरखाव के लिए इच्छुक संगठनों और ग्रुपों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह प्रक्रिया ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ के तहत शुरू की गई है, जिसमें निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाला कोई भी संगठन ठेका ले सकेगा।
गौरतलब है कि मैत्रीबाग भारत और रूस की दशकों पुरानी दोस्ती का प्रतीक माना जाता है और वर्षों से भिलाई स्टील प्लांट द्वारा इसका संचालन किया जा रहा है। लेकिन अब व्यवस्थापन इसे निजी संस्था के हवाले करने की तैयारी में है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्थानीय लोगों को लगभग नहीं है। सेल ने विज्ञापन जारी तो किया, लेकिन वह केवल अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित हुआ। इससे आम नागरिकों और मैत्रीबाग से भावनात्मक रूप से जुड़े लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इतने बड़े निर्णय को सार्वजनिक रूप से सामने लाना जरूरी नहीं था?
निजी संचालन से क्या मैत्रीबाग की सेवाओं में सुधार होगा या फिर टिकट दरों और सुविधाओं पर प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल भिलाई में इस कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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