छत्तीसगढ़ में नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू: जमीन के दाम बढ़े, किसानों को मिलेगा ज्यादा मुआवजा
नगरीय क्षेत्रों में 10% से 100% तक और ग्रामीण इलाकों में 50% से 300% तक बढ़ीं दरें; सात साल बाद हुआ बड़ा संशोधन
छत्तीसगढ़ में आज से नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू हो गई है। सात साल बाद किए गए इस बड़े संशोधन में जमीन की सरकारी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। नई दरों के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अधिक मुआवजा और नगरीय क्षेत्रों में संपत्ति की वास्तविक कीमत का आकलन आसान होगा।
रायपुर। पूरे राज्य में नई कलेक्टर गाइडलाइन 20 नवंबर से लागू कर दी गई है। यह दरें 1 अप्रैल से प्रभावी होनी थीं, लेकिन संशोधन व वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद अब इन्हें लागू किया गया है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और अंबिकापुर समेत कई जिलों में जमीन की गाइडलाइन दरों में 10% से लेकर 100% तक वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने गाइडलाइन दरों के व्यापक और वैज्ञानिक पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की है। राज्य सरकार का दावा है कि नई दरें किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं और इससे संपत्तियों का मूल्यांकन अब अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत होगा।
सात वर्षों बाद हुआ बड़ा बदलाव
गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का हर वर्ष पुनरीक्षण होना अनिवार्य है, लेकिन वर्ष 2017-18 के बाद से किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था। इस कारण वास्तविक बाजार दर और सरकारी गाइडलाइन में बड़ा अंतर हो गया था, जिससे किसानों, संपत्ति धारकों और खरीदारों को नुकसान उठाना पड़ रहा था।
नगरीय क्षेत्रों में एक ही सड़क, वार्ड या कॉलोनी में भी दरों में भारी असमानता थी। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी एक ही मार्ग पर बसे गाँवों की दरें असंतुलित थीं। इसके अलावा नई कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और हाइवे किनारे की जमीनों की कीमतें तय न होने से नागरिकों को वास्तविक संपत्ति मूल्य समझने में कठिनाई हो रही थी।
नई दरों में पारदर्शिता और सरलता पर जोर
वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, वैज्ञानिक और जनसुलभ बनाया गया है। नगरीय क्षेत्रों में रोड-वाइज गाइडलाइन तैयार की गई है, ताकि समान परिस्थितियों वाली जमीनों की दरें बराबर हो सकें।
ग्रामीण क्षेत्रों में गांवों की दरों को नक्शे में दर्ज कर समान परिस्थिति वाले गांवों की कीमतें तर्कसंगत की गई हैं। अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर गाइडलाइन को और आसान बनाया गया है।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
नई दरों से किसानों और भूमिस्वामियों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवजा मिलने का रास्ता खुल गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में दरों में 50% से लेकर 300% तक वृद्धि की गई है, जिससे मुआवजा तीन गुना तक बढ़ने की संभावना जताई गई है।
साथ ही, संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक ऋण लेने में भी आसानी होगी। आम नागरिकों के लिए अपनी जमीन या मकान की कीमत का आकलन अब पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और सरल होगा।
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