मां-बेटी के हत्याकांड में अदालत का कड़ा संदेश, तीन को फांसी और एक को उम्रकैद

सूरजपुर के बहुचर्चित मामले में फैसला; कुलदीप साहू के आचरण पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पीड़ित पिता बोले- न्याय की लड़ाई अभी जारी रहेगी

मां-बेटी के हत्याकांड में अदालत का कड़ा संदेश, तीन को फांसी और एक को उम्रकैद

रायपुर/सूरजपुर। सूरजपुर के मां-बेटी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए अपराध की गंभीरता के अनुरूप कठोर दंड दिया है। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि आर्यन विश्वकर्मा को जीवन के शेष समय तक जेल में रखने का आदेश दिया गया। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। वहीं, पुलिस परिवारों ने दीप जलाकर और पटाखे फोड़कर फैसले पर खुशी जताई।

अदालत ने मामले की भयावहता और आरोपियों के आचरण को ध्यान में रखते हुए सख्त टिप्पणी की। खास तौर पर कुलदीप साहू के उस व्यवहार का उल्लेख किया गया, जब वह एक अन्य मामले में सजा मिलने के बाद अदालत से बाहर निकलते समय मुस्कुराता नजर आया था। अदालत ने कहा कि इस तरह के गंभीर अपराध में पश्चाताप का अभाव चिंताजनक है और आरोपी का व्यवहार समाज में उसकी वापसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनाया गया फैसला

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सजा सुनाई। अंबिकापुर केंद्रीय जेल में बंद कुलदीप साहू को भी इसी माध्यम से फैसले की जानकारी दी गई। जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत के अनुसार, सजा सुनाए जाने के दौरान कुलदीप डरा हुआ दिखाई दिया।

इससे पहले दूसरे मामले में 10 साल की सजा मिलने के बाद उसके मुस्कुराते हुए अदालत से बाहर निकलने का वीडियो सामने आया था। मौजूदा मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के दौरान उसकी प्रतिक्रिया अलग दिखाई दी।

पीड़ित पिता ने साझा किया दर्द और संकल्प

अदालत के फैसले के बाद पीड़ित पिता ने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी की तस्वीर के साथ भावुक संदेश पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि लंबे समय से चले आ रहे दुख के बीच न्याय के फैसले ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। उनके मुताबिक, यह फैसला इस विश्वास को मजबूत करता है कि न्याय व्यवस्था में गंभीर अपराधों के लिए दंड का प्रावधान है।

उन्होंने न्याय की लड़ाई में साथ देने वालों का आभार व्यक्त किया। साथ ही कहा कि कठिन समय में उनके विरुद्ध षड्यंत्र और चालबाजी करने वालों को भी वह नहीं भूले हैं। पिता ने स्पष्ट किया कि अदालत के फैसले को उसके अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए आगे भी संघर्ष करना होगा।

घर से पांच किलोमीटर दूर मिले थे शव

घटना 13 अक्टूबर 2024 की है। सूरजपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 12 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। मामले में महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने का आरोप सामने आया था। वारदात के बाद दोनों के शव घर से लगभग पांच किलोमीटर दूर फेंक दिए गए थे।

जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, बच्ची के शरीर पर चाकू से 28 वार किए गए थे, जबकि उसकी मां पर 33 वार किए गए। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, फिंगरप्रिंट, कपड़ों पर खून के निशान और डीएनए जांच को विवेचना का हिस्सा बनाया। जांच में मां और बेटी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि होने की जानकारी भी सामने आई थी।

सितंबर में दोषी ठहराए गए थे चारों आरोपी

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को कुलदीप साहू समेत चारों आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया था। अदालत ने सजा सुनाने के लिए 8 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की थी। इसके बाद तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

रायपुर जेल स्थानांतरण की तैयारी

सजा के बाद दोषियों को रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किए जाने की बात कही गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य में फांसी देने की व्यवस्था रायपुर जेल में है। हालांकि, स्थानांतरण की वास्तविक स्थिति और आगे की कानूनी प्रक्रिया की पुष्टि आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए। मृत्युदंड के मामले में दोषियों के पास कानून के तहत उपलब्ध अपील और अन्य उपचारों की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।