जिंदा रहते ‘मृत’ बनकर निकाली NPS की रकम: 1.19 करोड़ के फर्जीवाड़े का खुलासा

जीवित रहते 60% निकासी का नियम, मौत पर मिलती है 100% राशि

जिंदा रहते ‘मृत’ बनकर निकाली NPS की रकम: 1.19 करोड़ के फर्जीवाड़े का खुलासा

दुर्ग जिले में नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। 15 सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने खुद को मृत दर्शाकर करीब 1 करोड़ 19 लाख रुपए की अवैध निकासी कर ली। मामले में ऑनलाइन सेवा केंद्र के संचालक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक पूर्व बीमा कर्मचारी फरार बताया जा रहा है।

दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में पेंशन से जुड़ा एक सनसनीखेज घोटाला उजागर हुआ है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 15 रिटायर्ड कर्मचारियों ने खुद को मृत दिखाकर अपनी नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) की पूरी राशि निकलवा ली। इस फर्जीवाड़े में कुल 1 करोड़ 19 लाख रुपए की अवैध निकासी की गई।

 

मामला पाटन थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालक राजेश कनोजिया (44) को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

 

ऐसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश

 

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर मृत्यु दावा किया गया, जबकि वह जीवित पाया गया। इस पर एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, बोकारो (झारखंड) के मैनेजर को संदेह हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

 

जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य केवाईसी दस्तावेज तैयार कर 15 खाताधारकों को मृत दर्शाया। इन दस्तावेजों के आधार पर बीमा दावे लगाए गए और राशि बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली गई।

 

5 प्रतिशत कमीशन पर हुई ‘सेटिंग’

 

पुलिस के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालक से संपर्क किया था। डील के तहत 5 प्रतिशत कमीशन तय किया गया। इसके बाद फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाकर ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से दावे स्वीकृत कराए गए।

 

पूर्व कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध

 

जांच में यह भी सामने आया कि एचडीएफसी लाइफ कंपनी का पूर्व कर्मचारी राजेश कुमार ठाकुर इस साजिश में शामिल था। उसने अपने अनुभव और सिस्टम की जानकारी का फायदा उठाते हुए फर्जी दस्तावेज अपलोड किए और सत्यापन प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दावे पास कराए। फिलहाल वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

 

नियमों का दुरुपयोग

 

एनपीएस योजना के नियमों के अनुसार खाताधारक जीवित रहते अधिकतम 60 प्रतिशत राशि निकाल सकता है, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि पेंशन के रूप में दी जाती है। मृत्यु की स्थिति में पूरी राशि नामिनी को मिलती है। आरोपियों ने इसी प्रावधान का दुरुपयोग करते हुए जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर 100 प्रतिशत रकम निकाल ली।

 

दस्तावेजों में दिखीं कई गड़बड़ियां

 

पुलिस जांच में पाया गया कि कई दावों में एक जैसे पते, अमान्य क्यूआर कोड वाले मृत्यु प्रमाण पत्र और संदिग्ध बैंक खातों के जरिए लेन-देन किया गया। आरोपी के पास से 10 हजार रुपए नकद और कई डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।

 

आरोपी जेल भेजा गया

 

पुलिस ने मुख्य आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है।

 

दुर्ग ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की जा रही है। इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।