भारत का राष्ट्रगान गाने पर चार छात्र निष्कासित, विश्वविद्यालय के फैसले पर उठे सवाल
वायरल वीडियो के बाद अनुशासन समिति की बैठक, निष्कासन का आदेश जारी
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित बाचा ख़ान यूनिवर्सिटी में भारत का राष्ट्रगान गाने के आरोप में चार छात्रों को निष्कासित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति ने कार्रवाई करते हुए छात्रों को हॉस्टल खाली करने का भी आदेश दिया। छात्रों का आरोप है कि उन्हें अपनी सफाई पेश करने का अवसर नहीं दिया गया।
खैबर पख्तूनख्वा (ए)। खैबर पख्तूनख्वा के लोअर दीर जिले से संबंध रखने वाले मुराद खान उन चार छात्रों में शामिल हैं, जिन्हें भारत का राष्ट्रगान गाने के आरोप में विश्वविद्यालय प्रशासन ने निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई 13 फरवरी को उस समय की गई, जब 11 फरवरी को आयोजित यूथ फेस्टिवल के दौरान बना एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वायरल वीडियो में फार्मेसी विभाग के छात्र जिब्रान रियाज़ को भारत का राष्ट्रगान गाते हुए देखा और सुना जा सकता है। उनके साथ खड़े कुछ अन्य छात्र भी उनका साथ देते नजर आते हैं। वीडियो के प्रसार के बाद विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति ने बैठक कर चार छात्रों—जिब्रान रियाज़, सैयद कातिब शाह, बशीर खान और मुराद खान—को निष्कासित करने का निर्णय लिया।
जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि छात्रों ने राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने और अशांति फैलाने की नीयत से राष्ट्रगान गाया तथा उसे रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया। साथ ही उन्हें हॉस्टल के कमरे तत्काल खाली करने के निर्देश दिए गए।
छात्रों का पक्ष
वीडियो वायरल होने के बाद जिब्रान रियाज़ ने एक अलग वीडियो जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यूथ फेस्टिवल के दौरान माहौल अनौपचारिक था और उन्होंने मज़ाक के तौर पर राष्ट्रगान गाया था। उनका दावा है कि किसी तरह की दुर्भावना नहीं थी।
दूसरी ओर, मुराद खान का कहना है कि उन्हें स्पष्टीकरण देने का अवसर नहीं दिया गया। उनके अनुसार, प्रशासन ने केवल यह बताया कि वे वीडियो में दिखाई दे रहे हैं और बाद में निष्कासन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सेमेस्टर और हॉस्टल की फीस पहले ही जमा कर दी गई थी और इस फैसले से उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हुआ है।
प्रशासन की चुप्पी
मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संपर्क किए जाने के बावजूद खबर प्रकाशित होने तक प्रशासन की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया था।
यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है और शैक्षणिक संस्थानों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अनुशासन और राष्ट्रीय संवेदनशीलता के मुद्दों पर बहस छेड़ रही है।
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