धान के दायरे से आगे निकली छत्तीसगढ़ की खेती, खेतों में उग रहे नवाचार के नए आयाम

दुर्ग के खपरी-गिरहोला गांव में ब्लूबेरी, ड्रैगन फ्रूट और इंटीग्रेटेड फार्मिंग का सफल प्रयोग, शिवराज सिंह चौहान बोले—किसानों से सीखने की जरूरत

दुर्ग,। छत्तीसगढ़ की खेती अब केवल परंपरागत धान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के सहारे नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। दुर्ग जिले के खपरी और गिरहोला गांव में खेतों में दिख रहे बदलाव किसानों के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह बात केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गांव के दौरे के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है और धान राज्य की पहचान है, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान के साथ-साथ फल, सब्जी, फूल और औषधीय फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है। खपरी और गिरहोला गांव में सब्जियों की विविध खेती, फल-फूल उत्पादन और आधुनिक नर्सरियों का संचालन इस सकारात्मक बदलाव का जीवंत उदाहरण है।

ब्लूबेरी और ड्रैगन फ्रूट से बदली खेती की तस्वीर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खपरी गांव स्थित AKS नर्सरी में ब्लूबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी उन्नत फसलों की खेती की जा रही है, जो वैज्ञानिक तकनीक और शोध का प्रतिफल है। इसके साथ ही खीर खजूर, फल-सब्जी और फूलों की खेती से न केवल स्थानीय मांग पूरी हो रही है, बल्कि किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्राफ्टिंग जैसी विधियों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन लिया जा रहा है। बैंगन की जड़ पर टमाटर तथा तीखी मिर्च की जड़ पर शिमला मिर्च उगाने से फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उत्पादन भी अधिक होता है।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग से बढ़ेगी किसानों की आय

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में फल, फूल, सब्जी और औषधीय खेती के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। केंद्र सरकार का लक्ष्य खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। इसी दिशा में इंटीग्रेटेड फार्मिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें परंपरागत खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़ा जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि लोग खेती छोड़ रहे हैं। कई पढ़े-लिखे युवा अब अन्य क्षेत्रों को छोड़कर खेती की ओर लौट रहे हैं। ऐसे प्रगतिशील किसान देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

दिल्ली में होगा कृषि चिंतन शिविर

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि आगामी 16 और 17 फरवरी को दिल्ली के पूसा संस्थान में कृषि चिंतन शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें एक सत्र प्रगतिशील किसानों के अनुभवों पर केंद्रित होगा, जिन्हें नीतियों में शामिल किया जाएगा और खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर विचार किया जाएगा।

कृषि के साथ ग्रामीण विकास पर भी जोर

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान और ग्रामीण विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा। आगामी बजट में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए पर्याप्त प्रावधान किए जाएंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत्तीसगढ़ में लंबित आवासों की भरपाई ब्याज सहित की जा रही है और विकास के साथ-साथ कृषि को और मजबूत किया जाएगा।