आबादी बराबर, स्वर्ण में जमीन-आसमान का अंतर: चीन 169 गोल्ड पर पहुंचा, भारत 21 पर अटका
टीम गेम्स में भारत ने जीते सभी 6 स्वर्ण, लेकिन कुल प्रदर्शन में पिछड़ा; 2022 के मुकाबले भी 7 गोल्ड कम
एशियन गेम्स में भारत के लिए क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी उम्मीद की सबसे बड़ी वजह बने। इन तीनों खेलों के महिला और पुरुष वर्ग में भारत ने सभी 6 स्वर्ण पदक जीत लिए, लेकिन बाकी खेलों में प्रदर्शन ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। भारत को कुल 21 गोल्ड मिले, जबकि चीन के खाते में 169 स्वर्ण आए। आबादी के स्तर पर दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर नहीं होने के बावजूद पदकों में इतनी बड़ी दूरी खेल व्यवस्था और तैयारी के कई पहलुओं पर सवाल उठाती है।
खेल। भारत के लिए एशियन गेम्स का एक पहलू बेहद सकारात्मक रहा। क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में महिला और पुरुष दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी ताकत दिखाई। यानी जिन खेलों में भारतीय टीमों को मजबूत अनुभव और प्रतिस्पर्धी ढांचा मिला, वहां परिणाम भी शानदार रहे।
लेकिन पूरे एशियन गेम्स की पदक तालिका दूसरी तस्वीर पेश करती है। भारत 21 स्वर्ण पदकों के साथ रहा, जबकि 2022 के एशियन गेम्स में देश ने 28 गोल्ड जीते थे। इस बार भारत के स्वर्ण पदकों में 7 की कमी आई। इसके विपरीत चीन ने 169 स्वर्ण पदक जीतकर भारत से करीब आठ गुना ज्यादा स्वर्ण अपने नाम किए।
सबसे अहम सवाल आबादी को लेकर है। भारत और चीन दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। दोनों देशों में खेल प्रतिभाओं की संख्या भी बहुत बड़ी है। फिर भी अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिताओं में दोनों के पदक प्रदर्शन में इतना बड़ा फासला क्यों दिखाई देता है?
इसका एक कारण खेलों का ढांचा माना जाता है। किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती। उसे शुरुआती उम्र से सही कोचिंग, नियमित प्रतियोगिताएं, बेहतर खेल मैदान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, फिटनेस और पोषण की सुविधा की जरूरत होती है।
भारत में क्रिकेट को मिलने वाली लोकप्रियता और संसाधनों का स्तर दूसरे खेलों में समान रूप से दिखाई नहीं देता। कई खेलों के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का पर्याप्त अनुभव हासिल करने में कठिनाई होती है। इसके अलावा प्रतिभा खोज और उसे लंबे समय तक उच्चस्तरीय प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया को भी लगातार मजबूत करने की जरूरत है।
चीन ने विभिन्न खेलों में लंबे समय से व्यवस्थित प्रशिक्षण और पदक आधारित तैयारी पर जोर दिया है। यही वजह है कि वहां केवल लोकप्रिय खेलों ही नहीं, बल्कि कई ऐसे खेलों में भी पदक आते हैं जिनकी भारत में सीमित लोकप्रियता है।
भारत के लिए चुनौती अब केवल अधिक खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में उतारने की नहीं, बल्कि सही प्रतिभाओं को कम उम्र में पहचानकर उन्हें वर्षों तक विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देने की है। टीम गेम्स में मिली सफलता यह साबित करती है कि मजबूत तैयारी और निरंतर निवेश से भारत भी शीर्ष स्तर के परिणाम हासिल कर सकता है। जरूरत इस मॉडल को दूसरे खेलों तक विस्तार देने की है।
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