जिस 3 माह के बेटे की छट्ठी में घर आने का किया था वादा, उसी ने दी शहीद पिता को मुखाग्नि… हर आंख हुई नम

जिस 3 माह के बेटे की छट्ठी में घर आने का किया था वादा, उसी ने दी शहीद पिता को मुखाग्नि… हर आंख हुई नम

तिरंगे में लिपटे जवान बेटे का पार्थिव शरीर देखकर सभी की आंखें नम हो गई। मृतक की मां-पिता, परिजनों एवं पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान के अंतिम विदाई दी गई।

सीआरपीएफ के जवान देवनारायण दर्रो ने 15 दिन बाद जनवरी में छट्ठी के कार्यक्रम में घर आने की बात परिजनों से कही थी। लेकिन मध्यप्रदेश के लांजी में ड्यूटी के दौरान सोमवार को उनके सीने में तेज दर्द हुआ और उनकी मौत हो गई। मंगलवार को शाम 6 बजे उनका पार्थिव शररी तिरंग में लिपटकर गृहग्राम आया

बेटे का पार्थिव शरीर देख रो पड़े परिजन

तिरंगे में लिपटे जवान बेटे का पार्थिव शरीर देखकर सभी की आंखें नम हो गई। मृतक की मां-पिता, परिजनों एवं पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान के अंतिम विदाई दी गई। मुक्तिधाम में रीतिरिवाज के अनुसार उनके तीन माह के बेटे ने मुखाग्नि दी।

बेटे के नामकरण संस्कार में आने का था वादा

जिस तीन माह के मासूम ने मुखाग्नि दी, उसी बेटे का नामकरण संस्कार जनवरी माह में था। परिजनों से वादा किया था कि वे जनवरी में घर आएंगे, लेकिन उनका पार्थिव शरीर ही घर लौटा।

भारत माता के जय के नारे लगे

जैसे ही पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो ग्रामीणों व स्कूली बच्चों ने भारत माता की जयकारे व देव नारायण अमर रहे के नारे लगाए। देश भक्ति गीतों व तिरंगा यात्रा के साथ मुक्तिधाम में अंतिम विदाई दी गई।