"रायपुर निगम का बजट: महिलाओं की ताकत बनी नई नीव, 1529 करोड़ से बदलेगा शहर का नक्शा"
रायपुर। पीली मखमली फाइल थामे मेयर मीनल चौबे जब निगम कार्यालय पहुंचीं, तो उनके कदमों में एक नए रायपुर का सपना साफ झलक रहा था। 1529 करोड़ 53 लाख के इस बजट ने न सिर्फ शहर की दिशा तय की है, बल्कि महिला सशक्तिकरण को बजट की रीढ़ बनाकर इतिहास रच दिया है।
बजट की पांच बड़ी बातें जो बदलेंगी रायपुर:
सुरक्षित शहर, सशक्त महिलाएं
तीन नए वर्किंग वीमेन हॉस्टल
50+ सार्वजनिक स्थलों पर 'पिंक रूम' (रेस्ट रूम + बेबी केयर यूनिट)
सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनों का शहरव्यापी नेटवर्क
सड़क से सशक्तिकरण तक
5000 स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा डिजिटल पेमेंट ट्रेनिंग का हुनर
'मोबाइल बाजार' योजना: फुटपाथ व्यापारियों के लिए डिजाइन्ड वेंडिंग जोन
थर्ड जेंडर को मुख्यधारा
समुदाय विशेष के लिए पहली बार अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम
'रेनबो स्किल हब' में सिखाई जाएंगी 21वीं सदी की जरूरी skills
स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट
कचरा संग्रह में AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
100% सीवेज ट्रीटमेंट का लक्ष्य
ग्रीन कवर मिशन
शहर के हर वार्ड में मिनी ऑक्सीजन पार्क
सोलर पावर्ड स्ट्रीट लाइटिंग प्रोजेक्ट
क्यों खास है यह बजट?
मेयर चौबे के शब्दों में - "यह बजट उन लोगों के लिए है जिन्हें अक्सर बजट में भुला दिया जाता था। आज हमने फुटपाथ की मजदूर महिला से लेकर तृतीय लिंग तक सबको बजट में जगह दी है।"
पिछले सालों का हिसाब-किताब:
वर्ष बजट आवंटन वास्तविक खर्च
2024-25 1901 करोड़ 819 करोड़ (43%)
2023-24 1608 करोड़ 889 करोड़ (55%)
2022-23 1475 करोड़ 980 करोड़ (66%)
विपक्ष की आवाज:
कांग्रेस नेता संजय शर्मा का आरोप - "यह सिर्फ दिखावा है। पिछले तीन साल के अधूरे प्रोजेक्ट्स पर चुप्पी क्यों?"
- आगे की राह:
मार्च 2025 तक सभी प्रस्तावित हॉस्टलों का शिलान्यास - अप्रैल से शुरू होगा 'डिजिटल दीदी' प्रशिक्षण कार्यक्रम
- मानसून से पहले 100% स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम की समीक्षा
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क्या यह बजट वास्तव में रायपुर को महिला-सशक्तिकरण की मिसाल बना पाएगा? या फिर यह सिर्फ कागजी घोषणाओं तक सीमित रहेगा? शहरवासियों की नजर अब इसके क्रियान्वयन पर होगी।
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