बिहार रुझान: NDA को 145-160 सीटों के साथ बढ़त, महागठबंधन 73-91 पर सिमटा

दोनों चरणों की वोटिंग के बाद रुझानों में एनडीए को स्पष्ट बढ़त — जेडीयू की स्थिति सुधरी, राजद-कांग्रेस गठबंधन को नुकसान; कई सीटों पर कड़ा मुकाबला

बिहार रुझान: NDA को 145-160 सीटों के साथ बढ़त, महागठबंधन 73-91 पर सिमटा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है और शुरुआती रुझानों में एनडीए स्पष्ट बढ़त के साथ सरकार बनाते हुए दिखाई दे रहा है। रुझानों के अनुसार, एनडीए को 145 से 160 सीटें, जबकि महागठबंधन को 73 से 91 सीटें मिलने के आसार हैं। इस बार जेडीयू ने उल्लेखनीय वापसी की है और वह 59 से 68 सीटों पर मजबूत स्थिति में दिख रही है।

पटना। बिहार में इस बार के चुनावी रुझान राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव दिखा रहे हैं। दोनों चरणों के मतदान (पहला 6 नवंबर, दूसरा 11 नवंबर) के बाद आए ताजा रुझानों में एनडीए गठबंधन को 145 से 160 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं महागठबंधन 73 से 91 सीटों पर सिमट सकता है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने की राह बन चुकी है।

जेडीयू की वापसी, राजद को नुकसान

इस चुनाव में जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) ने पिछले प्रदर्शन की तुलना में बेहतर वापसी की है और पार्टी 59 से 68 सीटों पर मजबूत दावेदारी रखती दिख रही है। वहीं, राजद-कांग्रेस गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

महागठबंधन के डिप्टी सीएम पद के उम्मीदवार मुकेश सहनी की स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है, उनका खाता खुलना मुश्किल नजर आ रहा है।

छोटे दलों का सीमित असर

प्रशांत किशोर की नई पार्टी जन सुराज तीन सीटों पर कड़े मुकाबले में है और इस बार उसका खाता खुलने की संभावना है।

वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM केवल एक सीट पर सीमित रह सकती है।

बड़ी सीटों पर कड़ा मुकाबला

कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर इस बार जबरदस्त टक्कर देखी जा रही है।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की लखीसराय सीट, मैथिली ठाकुर की अलीनगर, तेजप्रताप यादव की महुआ, रामकृपाल यादव की दानापुर और सम्राट चौधरी की तारापुर सीट पर फिलहाल मुकाबला बेहद रोमांचक बना हुआ है।

ग्राउंड रिपोर्ट और विशेषज्ञों का विश्लेषण

राज्यभर में 400 से अधिक रिपोर्टरों की इनपुट और स्थानीय फीडबैक के आधार पर राजनीतिक विशेषज्ञों व सीनियर जर्नलिस्टों ने मिलकर यह विश्लेषण तैयार किया है।

5 वरिष्ठ पत्रकारों, 4 राजनीतिक विश्लेषकों और 2 सेफोलॉजिस्ट की राय के साथ-साथ प्रमुख दलों के आंतरिक सर्वे को मिलाकर ये रुझान सामने आए हैं।