भिलाई में 16 नवंबर को भव्य प्राकृतिक चिकित्सा शिविर: बेलवा तालाब सरोवर में आठवां नेचुरोपैथी दिवस मनाया जाएगा

आयुष मंत्रालय, CCRYN, NIN एवं आईएनओ के संयुक्त तत्वावधान में 9–18 नवंबर तक देशभर में कार्यक्रम; भिलाई में मिट्टी स्नान, सन बाथ, मड फेस पैक और वृक्षासन जैसी सेवाएँ निशुल्क

भिलाई में 16 नवंबर को भव्य प्राकृतिक चिकित्सा शिविर: बेलवा तालाब सरोवर में आठवां नेचुरोपैथी दिवस मनाया जाएगा

भिलाई | भारत सरकार के आयुष मंत्रालय, CCRYN, NIN तथा इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन (INO) एवं सूर्या फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में नौ से अठारह नवंबर तक पूरे देश में आठवां प्राकृतिक चिकित्सा दिवस विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में भी लगातार जागरूकता कार्यक्रम जारी हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य के स्टेट कन्वीनर एवं आयोजन संयोजक मनोज ठाकरे ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा मानव स्वास्थ्य की सबसे प्राचीन एवं किफायती पद्धतियों में से एक है, जिसमें धूप, मिट्टी, जल और प्रकृति के अन्य पांच तत्वों के माध्यम से बिना दवाई स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जाता है।

उन्होंने बताया कि 9 नवंबर से राज्य के विभिन्न जिलों में थैरेपिस्ट, विशेषज्ञों और पदाधिकारियों द्वारा जन-जागरूकता हेतु गोष्ठियों, सेमिनारों और प्राकृतिक चिकित्सा शिविरों की शुरुआत की जा चुकी है। इसी श्रृंखला में 16 नवंबर को भिलाई नगर पालिक निगम के नेहरू नगर स्थित बेलवा तालाब (गुरु नानक सरोवर) में विशाल प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा।

शिविर में नेचुरोपैथी चिकित्सकों द्वारा आम लोगों को निशुल्क प्राकृतिक चिकित्सा सेवाएँ दी जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से मिट्टी स्नान, सन बाथ, मड फेस पैक, महिलाओं के लिए फेस पैक, वृक्षासन, जलनेति, मिट्टी पट्टी तथा अन्य नेचुरोपैथी क्रियाएँ शामिल हैं। कार्यक्रम सुबह 9:00 बजे से 12:30 बजे तक निशुल्क आयोजित होगा।

शिविर के लिए निःशुल्क पंजीयन जारी है और आयोजन को लेकर शहरवासियों में उत्साह देखा जा रहा है।

इसी अवसर पर आठवें नेचुरोपैथी डे का पोस्टर विमोचन भी किया गया, जिसे दुर्ग जिला साइंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सिंह, जिला आयुर्वेदिक अस्पताल आयुष अधिकारी डॉ. दिनेश चंद्रवंशी, तथा INA छत्तीसगढ़ के संरक्षक उमेश चितरंगिया ने संयुक्त रूप से जारी किया।

मनोज ठाकरे, डॉ. प्रमोद नामदेव, डॉ. निर्मला गुप्ता, नेरा सिंह तथा वरिष्ठ योग एवं नेचुरोपैथी थैरेपिस्ट आदित्य टंडन ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

शिविर में भिलाई-दुर्ग के सभी स्वास्थ्य एवं प्रकृति प्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर प्राकृतिक चिकित्सा का अनुभव लेने और इसे अपने जीवन में अपनाने का आग्रह किया गया है।