42 साल से अनोखी परंपरा : सत्तीचौरा में प्रतिदिन बदलता माता का श्रृंगार
नवरात्र पर दुर्ग की धार्मिक नगरी में प्रतिमा की पेंटिंग और आभूषण भी रोज़ होते हैं नए, हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे दर्शन को
नवरात्रि का पर्व आते ही दुर्ग की धर्मनगरी का ऐतिहासिक सत्तीचौरा मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है। यहां स्थापित दुर्गा माता की प्रतिमा पूरे प्रदेश में अपने आप में अनोखी है, क्योंकि प्रतिदिन उनका श्रृंगार पूरी तरह से बदला जाता है। केवल साड़ी या आभूषण ही नहीं, बल्कि प्रतिमा की पेंटिंग तक रोज़ बदली जाती है, जो छत्तीसगढ़ में कहीं और नहीं होता।
दुर्ग। नवरात्रि के पावन अवसर पर दुर्ग के गंजपारा स्थित सत्तीचौरा मंदिर में माता दुर्गा की 18 भुजाओं वाली प्रतिमा इस बार भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। विशेषता यह है कि यहां प्रतिमा का श्रृंगार प्रतिदिन नया रूप लेता है। सुबह 10 बजे से श्रृंगार की शुरुआत होती है, जिसमें प्रतिमा की साड़ी, आभूषण और रंग-रूप तक बदले जाते हैं। इस अद्वितीय परंपरा का निर्वहन पिछले 42 वर्षों से लगातार किया जा रहा है।
समिति के सुरेश गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1983 से यह परंपरा आरंभ हुई थी। तभी से लगातार प्रतिमा का श्रृंगार हर दिन अलग-अलग रूप में किया जा रहा है। करीब 10 हजार रुपए प्रतिदिन खर्च कर भक्तों के सहयोग से माता को नवीन स्वरूप प्रदान किया जाता है। पिछले 40 वर्षों से राजीव नगर निवासी हेमंत मानिकपुरी श्रृंगार की सेवा निभा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर की प्रतिमा पहले गंजमंडी में स्थापित होती थी और वहां की प्रतिमा को बहन माना जाता है। आज भी दोनों प्रतिमाओं के आमने-सामने से होकर गुजरने की परंपरा कायम है। यही कारण है कि सत्तीचौरा की यह प्रतिमा भक्तों की आस्था का विशेष केंद्र है।
इस वर्ष नवरात्रि में मंदिर परिसर में आकर्षक झांकियां भी सजाई गई हैं। बारह ज्योतिर्लिंग दर्शन और शिव वाटिका को प्रदर्शित करती झांकियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। भव्य प्रवेश द्वार और चलित झांकियों की सजावट देखने रोज़ हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दुर्ग का यह छोटा-सा मंदिर आज पूरे प्रदेश में अपने अलग श्रृंगार और परंपरा के लिए प्रसिद्ध हो चुका है।
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