दुर्ग विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल से निर्धन बालक को मिला शिक्षा और आश्रय का अधिकार

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की प्रेरणा से मानवता की मिसाल, छात्रावास व विद्यालय में प्रवेश दिलाकर उज्जवल भविष्य की राह खोली

दुर्ग विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल से निर्धन बालक को मिला शिक्षा और आश्रय का अधिकार

न्याय व्यवस्था के मानवीय स्वरूप को साकार करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने एक निर्धन एवं जरूरतमंद बालक को नया जीवन मार्ग दिया है। प्राधिकरण की तत्पर पहल से बालक को संदीपनी बालक छात्रावास फरीद नगर, भिलाई और समीपस्थ शासकीय विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया। यह कदम न्यायपालिका द्वारा कमजोर वर्गों के उत्थान हेतु चलाए जा रहे अभियानों का जीवंत उदाहरण बना।

दुर्ग। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने जुलाई 2025 में एक सराहनीय पहल करते हुए यह निर्देश दिए थे कि न्यायालयों में वसूले गए अर्थदंड का उपयोग बाल गृहों और संप्रेक्षण गृहों में रह रहे शारीरिक व मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद और मानसिक विकास में किया जाए। इस मानवीय पहल से प्रेरित होकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने NALSA (बालकों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और संरक्षण हेतु विधिक सेवाएं योजना, 2015) के अंतर्गत एक बालक के भविष्य को नई दिशा दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्कल नगर, दुर्ग निवासी छह वर्षीय बालक की माता का देहांत हो चुका था। पिता मजदूरी कर जीवन यापन कर रहा था, जिसके कारण वह बालक की देखरेख पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहा था। बच्चे का झुकाव अनुचित संगति की ओर बढ़ रहा था, जिससे उसकी मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।

स्थिति की जानकारी मिलते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने त्वरित पहल करते हुए छात्रावास अधीक्षक और विद्यालय प्रबंधन से संपर्क साधा। आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति के बाद बालक को संदीपनी बालक छात्रावास फरीद नगर, भिलाई एवं उसी परिसर स्थित शासकीय विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया।

इस पहल से न केवल बालक की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति विधिक सेवा प्राधिकरण की संवेदनशीलता भी उजागर हुई। इस पूरे प्रकरण में थाना सिटी कोतवाली के पैरालीगल वॉलेंटियर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने समन्वय और प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग दिया।