मोदी ने कहा- डिजिटल भारत ने घटाई दूरी, मोबाइल बना बैंक और सरकारी दफ्तर का विकल्प
डीबीटी से 5 लाख करोड़ की लीकेज रुकी, किसानों के खातों में पहुंचे 4 लाख करोड़; 5G के बाद अब AI और 6G पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत में मोबाइल फोन अब केवल बातचीत का साधन नहीं रहा, बल्कि यह बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी सेवाओं की पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस में उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है और इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपए की संभावित लीकेज रोकी गई।
नई दिल्ली (ए)। इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव को देश के डिजिटल बदलाव से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में मोबाइल कम्युनिकेशन गुड गवर्नेंस के महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरा है। भारत में डेटा और मोबाइल सेवाओं की कम कीमतों के पीछे देश की नीतियों और तकनीकी क्षमता का बड़ा योगदान है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में सरकारी और जरूरी सेवाओं तक पहुंच हमेशा आसान नहीं रही। पहले बैंक, अस्पताल और सरकारी कार्यालय मुख्य रूप से शहरों में केंद्रित थे। ग्रामीण और दूरदराज के लोगों को इन सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। मोबाइल तकनीक ने इस दूरी को काफी हद तक कम कर दिया है।
उन्होंने कहा कि आज बैंकिंग से लेकर अस्पताल और सरकारी सेवाओं तक कई सुविधाएं मोबाइल फोन के जरिए हासिल की जा सकती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लोगों के समय और खर्च दोनों को कम किया है।
मोदी ने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाई है। सरकारी पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पहुंच रहा है। उनके मुताबिक इस व्यवस्था से करीब 5 लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जिस रकम के रास्ते में लीकेज की संभावना रहती थी, अब वही राशि सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रही है।
पीएम किसान सम्मान निधि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के खातों में अब तक 4 लाख करोड़ रुपए पहुंचाए जा चुके हैं। यह सहायता हर चार महीने में दी जाती है। उनके अनुसार डिजिटल माध्यम ने सरकारी सहायता की पहुंच को उन लोगों तक बढ़ाया है, जो पहले ऐसी योजनाओं से दूर रह जाते थे।
डिजिटल शिक्षा का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल इंटरनेट ने शिक्षा के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं पैदा की हैं। कोरोना काल में जब स्कूल और संस्थान बंद थे, तब डिजिटल माध्यमों ने पढ़ाई को जारी रखने में मदद की। दीक्षा प्लेटफॉर्म पर 2022 तक 500 करोड़ से अधिक लर्निंग सेशन दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ऑनलाइन शिक्षा के साधनों का लाभ गरीब और दूरदराज के बच्चों तक भी पहुंचे।
मोदी ने भारत में मोबाइल निर्माण की बढ़ती क्षमता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक आधुनिक डिजिटल उपकरणों तक पहुंच सीमित थी। भारत ने मोबाइल फोन को तकनीकी बदलाव का माध्यम बनाया और देश में निर्माण को बढ़ावा दिया। इससे तकनीक की पहुंच आम लोगों तक बढ़ी और ईज ऑफ लिविंग में सुधार हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता बनने तक सीमित नहीं रहना चाहता। आने वाले समय में डिजाइन और तकनीक दोनों भारत में विकसित करने पर जोर रहेगा। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों और वैश्विक संस्थाओं से ऐसा सुरक्षित नेटवर्क विकसित करने का आग्रह किया, जो गलत गतिविधियों को रोकने में सक्षम हो।
साइबर अपराध पर वैश्विक सहयोग की जरूरत
प्रधानमंत्री ने साइबर फ्रॉड को अंतरराष्ट्रीय चुनौती बताते हुए कहा कि अपराधी सीमाओं से परे जाकर गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। एक देश में बैठा व्यक्ति दूसरे देशों की तकनीक या नेटवर्क का इस्तेमाल करके तीसरे देश में अपराध कर सकता है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर साझा व्यवस्था विकसित करना जरूरी है।
उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का भी जिक्र किया। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण में सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष भारत ने इस दिशा में काफी प्रगति की है, लेकिन आगे अभी कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार करने हैं।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 6G तकनीक पर विशेष ध्यान रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2022 में इसी मंच से भारत में 5G की शुरुआत हुई थी और 2023 में देश की 5G प्रगति दुनिया के सामने रखी गई थी। इस आयोजन में 100 से अधिक देशों से करीब डेढ़ लाख लोगों के शामिल होने की बात कही गई है।
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