महंगाई रोकने के लिए RBI का बड़ा फैसला, रेपो रेट 5.50% हुई
चार साल बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दर, होम-कार लोन की EMI बढ़ने की आशंका; महंगाई का अनुमान भी 5.2% किया
नई दिल्ली (ए)। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर बाजार को बड़ा संकेत दिया है। RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में इजाफा किया है। इसका असर बैंकिंग व्यवस्था से लेकर आम ग्राहक के कर्ज तक दिखाई दे सकता है।
मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों में बदलाव की घोषणा की। केंद्रीय बैंक ने महंगाई के जोखिम को देखते हुए दर बढ़ाने का फैसला किया है। RBI का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता दबाव और खराब मौसम खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर डाल सकते हैं।
रेपो रेट बढ़ने का मतलब है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से मिलने वाला अल्पकालिक कर्ज महंगा हो जाएगा। बैंक इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। ऐसे में नए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी संभव है। मौजूदा फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों पर भी EMI बढ़ने या लोन की अवधि लंबी होने का असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ब्याज दर बढ़ने से बैंक FD और अन्य जमा योजनाओं पर अधिक ब्याज देने की दिशा में भी कदम उठा सकते हैं। इससे बचत करने वाले लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.6 प्रतिशत रखा गया है।
वहीं, वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तिमाही में GDP वृद्धि 7.2 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए 7.1 प्रतिशत का अनुमान है।
आगे रेपो रेट में कटौती तभी संभव होगी, जब महंगाई पर लगातार नियंत्रण बना रहे और आर्थिक परिस्थितियां इसकी अनुमति दें। RBI हर मौद्रिक नीति बैठक में महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक परिस्थितियों की समीक्षा करके ब्याज दरों पर निर्णय लेता है।
इस साल अप्रैल, जून और अगस्त में हुई तीन मौद्रिक नीति बैठकों में RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। तीनों बार यह 5.25 प्रतिशत पर बनी रही। अक्टूबर की बैठक में अब इसे बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया गया है।
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