फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “मुफ्त सुविधाओं से काम करने की प्रवृत्ति कमजोर होगी”
रोजगार सृजन पर जोर, बिना भेदभाव मुफ्त बिजली देने के प्रस्ताव पर उठाए सवाल
नई दिल्ली (ए)। मुफ्त योजनाओं की बढ़ती प्रवृत्ति पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि सरकारें लोगों को लगातार मुफ्त भोजन, गैस और बिजली जैसी सुविधाएं देती रहेंगी तो काम करने की प्रेरणा पर असर पड़ सकता है। न्यायालय ने सरकारों को सलाह दी कि वे रोजगार के अवसर बढ़ाने पर प्राथमिकता दें, ताकि लोग आत्मनिर्भर बन सकें।
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें Tamil Nadu Power Distribution Corporation Limited ने 2024 के विद्युत संशोधन नियमों के प्रावधान को चुनौती दी है। इस नियम के तहत उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति देखे बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव शामिल है।
“कल्याण और तुष्टीकरण में फर्क जरूरी”
सुनवाई कर रही पीठ में Surya Kant, Joymalya Bagchi और Vipul M. Pancholi शामिल थे। पीठ ने कहा कि जरूरतमंदों को राहत देना समझ में आता है, लेकिन भुगतान करने में सक्षम और असमर्थ उपभोक्ताओं के बीच भेद किए बिना सबको मुफ्त सुविधा देना संतुलित नीति नहीं मानी जा सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि अधिकांश राज्य राजस्व घाटे में हैं, इसके बावजूद चुनावों के आसपास मुफ्त योजनाओं की घोषणाएं की जाती हैं। इस प्रवृत्ति पर सभी राजनीतिक दलों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
“रोजगार से मिलेगा सम्मान”
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारों को ऐसे अवसर सृजित करने चाहिए, जिससे लोग रोजगार पाकर अपनी आय अर्जित करें और आत्मसम्मान बनाए रखें। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सबकुछ मुफ्त मिलेगा तो काम करने की प्रेरणा कैसे बनी रहेगी। अदालत ने इसे देश के दीर्घकालिक विकास से जोड़ते हुए संतुलन की आवश्यकता बताई।
मामला क्या है?
राज्य सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को हर दो महीने में लगभग 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराती है। यह सुविधा उपभोक्ता की आय या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना दी जाती है। याचिकाकर्ता कंपनी का कहना है कि यह प्रावधान वित्तीय अनुशासन और विद्युत क्षेत्र की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।
केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि बिजली दरों की घोषणा के बाद अचानक मुफ्त बिजली का निर्णय क्यों लिया गया।
फ्रीबीज बनाम विकास की बहस तेज
अदालत की टिप्पणी ने ‘मुफ्त योजनाएं बनाम रोजगार आधारित विकास’ की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि आगामी सुनवाई में सरकार और अन्य पक्ष इस पर क्या तर्क रखते हैं।
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