ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में ननों और युवक को सशर्त जमानत, नेताओं ने बताया संविधान की जीत
बजरंग दल की भूमिका पर उठे सवाल, सांसद जॉन ब्रिटास बोले- किस अधिकार से की गई कार्रवाई?
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में जेल में बंद दो ननों और एक युवक को विशेष एनआईए कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कई नेताओं ने इसे ‘संविधान की जीत’ करार देते हुए बजरंग दल की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, मामले को फर्जी बताते हुए जल्द जांच की मांग भी उठने लगी है।
रायपुर। दुर्ग रेलवे स्टेशन से शुरू हुए ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में गिरफ्तार केरल की दो नन और नारायणपुर के एक युवक को बिलासपुर की एनआईए कोर्ट ने शुक्रवार को सशर्त जमानत दे दी। यह मामला हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा, जहां संसद से लेकर सड़कों तक विरोध-प्रदर्शन और समर्थन में आवाज़ें उठीं।
ननों की गिरफ्तारी को लेकर केरल और पूर्वोत्तर राज्यों के सांसद लगातार विरोध जता रहे थे। जमानत के बाद सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह संविधान की जीत है। बजरंग दल को कौन-सा संवैधानिक अधिकार है कि वह लोगों को हिरासत में ले और आरोप लगाए?" उन्होंने पूरी घटना को दुर्भावनापूर्ण और फर्जी करार दिया।
गौरतलब है कि 24 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने तीन आदिवासी लड़कियों, एक युवक और दो ननों को रोककर जीआरपी थाना ले जाकर उनके खिलाफ मानव तस्करी की FIR दर्ज करवाई थी। इसके बाद ननों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
इस केस के बाद देशभर में विरोध शुरू हुआ। केरल से आए सांसदों का दल दुर्ग जेल पहुंचा, वहीं मेघालय के मुख्यमंत्री ने भी सार्वजनिक रूप से केस रद्द करने की अपील की। अब जबकि कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, बहस इस बात पर छिड़ गई है कि बजरंग दल को इस तरह की कार्रवाई का कानूनी अधिकार किसने दिया?
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